Monday, 3 November 2014

प्रेरणादायक कविताएं (Inspirational Poems)

प्रेरणादायक कविताएं (Inspirational Poems)

एक ऐसी कविता है आदरणीय श्री मैथिलीशरण गुप्त जी की, जिसे सबसे पहले मैंने अपनी माँ के मुख से ही सुना था। बचपन में नित्य ही उन्हें यह कविता मैंने गुनगुनाते हुए सुनी है। बड़ी ही मधुर है यह सुनने में, और इसका अर्थ समझते ही माधुर्य और भी बढ़ जाता है।  

कविता - नर हो न निराश करो मन को 
कवि - मैथिलिशरण गुप्त 



इंटरनेट पर ब्राउज करते हुए कई बार कुछ ऐसे अनमोल वचन मिल जाते हैं, जो प्रेरणा से परिपूर्ण होते हैं, और जिन्हें जितनी बार शेयर किया जाए, काम होता है। एक ऐसा ही लेख मुझे मिला http://anmolvachan.in/ पर, जिसे मैं यहाँ दुहराता हूँ। 

मंज़िल मिल ही जायेगी एक दिन भटकते-भटकते ही सही!
गुमराह तो वो हैं, जो घर से निकले ही नहीं!
खुशियाँ मिल ही जाएंगी, रोते-रोते ही सही!
कमज़ोर दिल के हैं वो, जो हँसने की  सोचते ही नहीं!
पूरे होंगे हर वो ख़्वाब, जो देखें हैं अँधेरी रातों में!
नासमझ हैं वो, जो डर से पूरी रात सोते ही नहीं!


एक ऐसी कविता जिसे अपने समय के एक बहुत ही नामी कवि ने लिखा है और जो नित्य ही हमें अपने लक्ष्य पर पहुँचने हेतु केवल समझाती ही नहीं, बल्कि उत्साहित भी करती है। प्रस्तुत है -

कवि - रामधारी सिंह दिनकर


एक बहुत खूबसूरत कविता/ग़ज़ल जो मैंने अभी कुछ दिनों पहले ही पढ़ी है -

ग़ज़ल
रचनाकार - दुष्यंत कुमार 

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